उद्योग पर्व  अध्याय ८१

वैशम्पाय़न उवाच

तच्चेद्दद्यादसङ्गेन सत्कृत्यानवमन्य च |  ५२   क
प्रिय़ं मे स्यान्महावाहो मुच्येरन्महतो भय़ात् ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति