menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
इन्द्रिय़ाणां यमे यत्तो भव राजन्नतन्द्रितः |  १९   क
वुद्धिश्च मा ते च्यवतु निय़च्छैतां यतस्ततः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति