उद्योग पर्व  अध्याय ६७

धृतराष्ट्र उवाच

दुर्योधन हृषीकेशं प्रपद्यस्व जनार्दनम् |  ६   क
आप्तो नः सञ्जय़स्तात शरणं गच्छ केशवम् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति