menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५८
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
वर्तमाने महाराज महे रैवतकस्य च |  ४   क
उपाय़ात्पुण्डरीकाक्षो युय़ुधानानुगस्तदा ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति