वन पर्व  अध्याय २३६

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्तस्तु कर्णेन राजा दुर्योधनस्तदा |  १५   क
उवाचावाक्षिरा राजन्वाष्पगद्गदय़ा गिरा ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति