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विराट पर्व
अध्याय ५३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कनकपुङ्खानां शराणां नतपर्वणाम् |  ३६   क
विय़च्चराणां विय़ति दृश्यन्ते वहुशः प्रजाः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति