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द्रोण पर्व
अध्याय ६७
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सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णोऽव्रवीत्पार्थं कृतवर्मणि मा दय़ाम् |  २५   क
कुरुसाम्वन्धिकं कृत्वा प्रमथ्यैनं विशातय़ ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति