menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय १७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्तु द्विरदमारुह्याचलसंनिभम् |  २   क
छत्रेण ध्रिय़माणेन वीज्यमानश्च चामरैः |  २   ख
न गन्तव्यं न गन्तव्यमिति मद्रानवारय़त् ||  २   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति