menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तावप्येनं विव्यधतुर्दशभिर्दशभिः शरैः |  ३०   क
सञ्चिच्छिदतुरप्यस्य ध्वजं कार्मुकमेव च ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति