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वन पर्व
अध्याय ८६
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धौम्य उवाच
तत्रैव तृणसोमाग्नेः सम्पन्नफलमूलवान् |  १४   क
आश्रमोऽगस्त्यशिष्यस्य पुण्यो देवसभे गिरौ ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति