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कर्ण पर्व
अध्याय ६७
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सञ्जय़ उवाच
कर्णे हते कुरवः प्राद्रवन्त; भय़ार्दिता गाढविद्धाश्च सङ्ख्ये |  ३६   क
अवेक्षमाणा मुहुरर्जुनस्य; ध्वजं महान्तं वपुषा ज्वलन्तम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति