आदि पर्व  अध्याय ६८

वैशम्पाय़न उवाच

संरम्भामर्षताम्राक्षी स्फुरमाणोष्ठसम्पुटा |  २१   क
कटाक्षैर्निर्दहन्तीव तिर्यग्राजानमैक्षत ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति