आदि पर्व  अध्याय ६८

वैशम्पाय़न उवाच

सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रजावती |  ३९   क
सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता ||  ३९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति