शान्ति पर्व  अध्याय ६८

भीष्म उवाच

अन्तश्चाकाशमेव स्याल्लोकोऽय़ं दस्युसाद्भवेत् |  २०   क
पतेच्च नरकं घोरं यदि राजा न पालय़ेत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति