शान्ति पर्व  अध्याय ६८

भीष्म उवाच

न योनिपोषो वर्तेत न कृषिर्न वणिक्पथः |  २१   क
मज्जेद्धर्मस्त्रय़ी न स्याद्यदि राजा न पालय़ेत् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति