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शान्ति पर्व
अध्याय ६८
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भीष्म उवाच
तस्य यो वहते भारं सर्वलोकसुखावहम् |  ३८   क
तिष्ठेत्प्रिय़हिते राज्ञ उभौ लोकौ हि यो जय़ेत् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति