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शान्ति पर्व
अध्याय ६८
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भीष्म उवाच
यदा पश्यति चारेण सर्वभूतानि भूमिपः |  ४३   क
क्षेमं च कृत्वा व्रजति तदा भवति भास्करः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति