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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं विप्रलपन्तीं तु दृष्ट्वा निपतितां पुनः |  १४   क
उत्तरां ताः स्त्रिय़ः सर्वाः पुनरुत्थापय़न्त्युत ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति