वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

ततो गच्छेत धर्मज्ञ तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् |  १६०   क
आदित्यस्याश्रमो यत्र तेजोराशेर्महात्मनः ||  १६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति