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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
एकविंशतिशाखं च ऋग्वेदं मां प्रचक्षते |  ३२   क
सहस्रशाखं यत्साम ये वै वेदविदो जनाः |  ३२   ख
गाय़न्त्यारण्यके विप्रा मद्भक्तास्तेऽपि दुर्लभाः ||  ३२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति