वन पर्व  अध्याय २२६

वैशम्पाय़न उवाच

प्रव्राज्य पाण्डवान्वीरान्स्वेन वीर्येण भारत |  २   क
भुङ्क्ष्वेमां पृथिवीमेको दिवं शम्वरहा यथा ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति