menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तं ध्यानमूकं कृपणं भृशार्त; मार्ताय़निर्दीनमुवाच वाक्यम् |  १४   क
पश्येदमुग्रं नरवाजिनागै; राय़ोधनं वीरहतैः प्रपन्नम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति