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शान्ति पर्व
अध्याय २३२
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व्यास उवाच
एवं सर्वात्मनः साधोः सर्वत्र समदर्शिनः |  ३०   क
षण्मासान्नित्ययुक्तस्य शव्दव्रह्मातिवर्तते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति