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कर्ण पर्व
अध्याय ६८
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सञ्जय़ उवाच
तं द्रोणपुत्रप्रमुखा नरेन्द्राः; सर्वे समाश्वास्य सह प्रय़ान्ति |  ३३   क
निरीक्षमाणा मुहुरर्जुनस्य; ध्वजं महान्तं यशसा ज्वलन्तम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति