आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २०

वैशम्पाय़न उवाच

ततोऽनन्तरमेवात्र सर्ववर्णान्महीपतिः |  ११   क
अन्नपानरसौघेन प्लावय़ामास पार्थिवः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति