अनुशासन पर्व  अध्याय ६९

भीष्म उवाच

निविशन्त्यां पुरा पार्थ द्वारवत्यामिति श्रुतिः |  २   क
अदृश्यत महाकूपस्तृणवीरुत्समावृतः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति