अनुशासन पर्व  अध्याय ६९

व्राह्मण उवाच

त्वय़ा तु तारितोऽस्म्यद्य किमन्यत्र तपोवलात् |  २८   क
अनुजानीहि मां कृष्ण गच्छेय़ं दिवमद्य वै ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति