वन पर्व  अध्याय ६९

वृहदश्व उवाच

स त्वर्यमाणो वहुश ऋतुपर्णेन वाहुकः |  ११   क
अध्यगच्छत्कृशानश्वान्समर्थानध्वनि क्षमान् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति