वन पर्व  अध्याय ६९

वाहुक उवाच

एते हय़ा गमिष्यन्ति विदर्भान्नात्र संशय़ः |  १५   क
अथान्यान्मन्यसे राजन्व्रूहि कान्योजय़ामि ते ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति