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शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
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भीष्म उवाच
प्राणिनां सर्वतो वाय़ुश्चेष्टा वर्तय़ते पृथक् |  ३५   क
प्राणनाच्चैव भूतानां प्राण इत्यभिधीय़ते ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति