वन पर्व  अध्याय ६९

वृहदश्व उवाच

विदर्भान्यातुमिच्छामि दमदन्त्याः स्वय़ंवरम् |  २   क
एकाह्ना हय़तत्त्वज्ञ मन्यसे यदि वाहुक ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति