वन पर्व  अध्याय ६९

वृहदश्व उवाच

रश्मिभिश्च समुद्यम्य नलो यातुमिय़ेष सः |  २०   क
सूतमारोप्य वार्ष्णेय़ं जवमास्थाय़ वै परम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति