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द्रोण पर्व
अध्याय ६९
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द्रोण उवाच
अद्भुतं चाद्य पश्यन्तु लोके सर्वधनुर्धराः |  ३४   क
विषक्तं त्वय़ि कौन्तेय़ं वासुदेवस्य पश्यतः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति