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द्रोण पर्व
अध्याय ६९
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सञ्जय़ उवाच
त्वरन्नेकरथेनैव समेत्य द्रोणमव्रवीत् |  ४   क
गतः स पुरुषव्याघ्रः प्रमथ्येमां महाचमूम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति