आदि पर्व  अध्याय १३९

वैशम्पाय़न उवाच

कुतस्त्वमसि सम्प्राप्तः कश्चासि पुरुषर्षभ |  १९   क
क इमे शेरते चेह पुरुषा देवरूपिणः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति