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शल्य पर्व
अध्याय ६२
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वैशम्पाय़न उवाच
तदिदं समनुप्राप्तं तव वाक्यं नृपात्मजे |  ५९   क
एवं विदित्वा कल्याणि मा स्म शोके मनः कृथाः |  ५९   ख
पाण्डवानां विनाशाय़ मा ते वुद्धिः कदाचन ||  ५९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति