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आदि पर्व
अध्याय ७
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सूत उवाच
यथा सूर्यांशुभिः स्पृष्टं सर्वं शुचि विभाव्यते |  २१   क
तथा त्वदर्चिर्निर्दग्धं सर्वं शुचि भविष्यति ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति