सौप्तिक पर्व  अध्याय ७

द्रौणिरु उवाच

इमां चाप्यापदं घोरां तराम्यद्य सुदुस्तराम् |  १२   क
सर्वभूतोपहारेण यक्ष्येऽहं शुचिना शुचिम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति