उद्योग पर्व  अध्याय १५५

वैशम्पाय़न उवाच

ततः स कवची खड्गी शरी धन्वी तली रथी |  १८   क
ध्वजेनादित्यवर्णेन प्रविवेश महाचमूम् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति