सौप्तिक पर्व  अध्याय ७

द्रौणिरु उवाच

इममात्मानमद्याहं जातमाङ्गिरसे कुले |  ५४   क
अग्नौ जुहोमि भगवन्प्रतिगृह्णीष्व मां वलिम् ||  ५४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति