सौप्तिक पर्व  अध्याय ७

द्रौणिरु उवाच

तमूर्ध्ववाहुं निश्चेष्टं दृष्ट्वा हविरुपस्थितम् |  ५९   क
अव्रवीद्भगवान्साक्षान्महादेवो हसन्निव ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति