अनुशासन पर्व  अध्याय ७

युधिष्ठिर उवाच

कर्मणां मे समस्तानां शुभानां भरतर्षभ |  १   क
फलानि महतां श्रेष्ठ प्रव्रूहि परिपृच्छतः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति