आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७

संवर्त उवाच

चिकीर्षसि यथाकामं सर्वमेतत्त्वय़ि ध्रुवम् |  १९   क
यदि सर्वानभिप्राय़ान्कर्तासि मम पार्थिव ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति