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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ७
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वैशम्पाय़न उवाच
ततोऽव्रवीन्महातेजा धर्मपुत्रं स पार्थिवः |  १८   क
अनुज्ञातस्त्वय़ा पुत्र भुञ्जीय़ामिति कामय़े ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति