वन पर्व  अध्याय ७

वैशम्पाय़न उवाच

स सभाद्वारमागम्य विदुरस्मारमोहितः |  २   क
समक्षं पार्थिवेन्द्राणां पपाताविष्टचेतनः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति