वन पर्व  अध्याय ७

विदुर उवाच

पाण्डोः सुता यादृशा मे तादृशा मे सुतास्तव |  २३   क
दीना इति हि मे वुद्धिरभिपन्नाद्य तान्प्रति ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति