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विराट पर्व
अध्याय ७
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विराट उवाच
यथा हि कामस्तव तत्तथा कृतं; महानसे त्वं भव मे पुरस्कृतः |  १०   क
नराश्च ये तत्र ममोचिताः पुरा; भवस्व तेषामधिपो मय़ा कृतः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति