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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
ऊर्ध्ववेणीधराश्चैव पिङ्गाक्ष्यो लम्वमेखलाः |  ३३   क
लम्वोदर्यो लम्वकर्णास्तथा लम्वपय़ोधराः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति