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द्रोण पर्व
अध्याय १४३
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सञ्जय़ उवाच
तस्य तत्कुर्वतः कर्म नकुलस्य सुतो रणे |  ११   क
अर्धचन्द्रेण चिच्छेद चापं रत्नविभूषितम् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति