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विराट पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्जुनस्य किलासीस्त्वं सारथिर्दय़ितः पुरा |  १३   क
त्वय़ाजय़त्सहाय़ेन पृथिवीं पाण्डवर्षभः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति