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विराट पर्व
अध्याय ४३
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कर्ण उवाच
समाहितो हि वीभत्सुर्वर्षाण्यष्टौ च पञ्च च |  ६   क
जातस्नेहश्च युद्धस्य मय़ि सम्प्रहरिष्यति ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति